सरगर्मी
19-21 सितंबर को बाँदा में हुए जलेस के ग्यारहवें राष्ट्रीय सम्मेलन में कुल दस प्रस्ताव रखे गये और मामूली संशोधनों
विचार
आज विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए थोड़े बदलाव के साथ जवरीमल्ल पारख का यह आलेख। इसका यह बलाघात
प्रखर अध्येता और समाजवैज्ञानिक कमल नयन चौबे ने टॉम बॉटमोर द्वारा संपादित ए डिक्शनरी ऑफ़ मार्क्सिस्ट थॉट का हिंदी अनुवाद
प्रताप दीक्षित के नवीनतम कहानी संग्रह ‘कगार के आख़िरी सिरे पर’ की समीक्षा कर रहे हैं माधव महेश. ‘उम्मीद पर
अस्मिता
‘धर्मांतरण : आंबेडकर की धम्म यात्रा’ बाबासाहेब आंबेडकर के धर्मांतरण संबंधी लेखन और भाषणों का संकलन है। इसे संपादित किया
विगत 32 वर्षों से मानव-शास्त्र और समाज-शास्त्र के अध्ययन और अध्यापन में लगे ज्ञान चंद बागड़ी इन दिनों आदिवासी इलाक़ों
चंचल चौहान की पुस्तक, ‘साहित्य का दलित सौंदर्यशास्त्र’ राधाकृष्ण प्रकाशन से हाल ही में प्रकाशित हुई है। भूमिका, उपसंहार और
देशकाल
“भारतीय संविधान के मूल में यह मान्यता थी कि भारत विभिन्न राष्ट्रीयताओं का संघ है क्योंकि भारत विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रीय
19-21 सितंबर को बाँदा में हुए जलेस के ग्यारहवें राष्ट्रीय सम्मेलन में कुल दस प्रस्ताव रखे गये और मामूली संशोधनों
जनवादी लेखक संघ के ग्यारहवें राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्र की रिपोर्ट का जो मसौदा पेश किया गया, उस पर बहस
आलोचना
आज विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए थोड़े बदलाव के साथ जवरीमल्ल पारख का यह आलेख। इसका यह बलाघात
कथाकार अमरकांत के इस जन्मशती वर्ष में आप पहले ‘ज़िंदगी और जोंक’ पर चंचल चौहान का लेख पढ़ चुके हैं।
‘एक भ्रांति है कि किसी नामचीन आलोचक के फ़तवे से कोई कहानी महान हो सकती है। वह कालजयी तो अपनी












